तेरी डोली उठी (Hate Shayari)

तेरी डोली उठी,
मेरी मयात उठी,
फूल तुझ पर भी बरसे,
फूल मुझ पर भी बरसे,
फर्क़ सिर्फ इतना सा था,
तू सज गयी,
मुझे सजाया गया,
तू भी घर को चली,
मै भी घर को चला,
फर्क़ सिर्फ इतना सा था,
तो उठ के गयी,
मुझे उठाया गया,
मेहफिल वहा भी थी,
लोग यहाँ भी थे,
फर्क़ सिर्फ इतना सा था,
उनका हंसना वहाँ,
इनका रोना यहाँ,
क़ाज़ी उधर भी था, मोलवी इधर भी था,
दो बोल तेरे पडे, दो बोल मेरे पडे,
तेरा निकाह पडा,
मेरा जनाज़ा पडा,
फर्क़ सिर्फ इतना सा था,
तुझे अपनाया गया,
मुझे दफनाया गया.
Posted By : SAMEER
Posted On : Sep 20, 2007
Views : 4944
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