तेरे होठो से किसी और का नाम सुना नही जाता
दिल लगाने वाला क्या तुझे मुझ पर रहम नही आता
पुकारते हो जब किसी को तुम ये दिल से सहा नही जाता
लुट जाता है मेरा संसार फिर इस दिल को चैन नही आता
हर सांस की निकलती है फिर दर्द भरी आहे
नही देख पाती खुद की हलात ये मेरी जलती हुई निगाहे
ठोकर लगाने से पहले मेरे दिल को तुम ये क्यो नही सोचते
इस मे सिर्फ तुम हो किसी और का साथ अब मुझे रास नही आता
माना है तुझे खुदा रखी है अपनी जान तेरे इन कदमो मे
मोहब्बत मेरी कम या फिर ये सब तुम्हे नज़र नही आता
तेरे होठो से किसी और का नाम सुना नही जाता
दिल लगाने वाले क्यो तुझे मुझ पर रहम नही आता |