उठा के देखा तो रास्ता पाया
दोस्त को राह पर खडा पाया
मिट गयी सब शिकायते दिल की
दिल से दिलदार को जो चिपटाया
कल जो बोया था बीज कोशिश का
आज उसका ही फल बडा पाया
दोस्त इन्सानियत के पेडो को
सख्ता तूफान भी ना झुका पाया
वो उजाला भी क्या उजाला है
जो अंधेरो को ना मिटा पाया
इस अमीरो के मुल्क को यारो
भुखमरी से तडपता पाया
बात करता है वो सलीके से
उसकी नियत मे खोट सा पाया
वोट ले कर वो हो गया गयाब
हमने खुद को ठगा ठगा पाया
ऐसा सुनके वो पूछता है फिर
शेर लिखकर के हमने क्या पाया
कशमश थी की छोडती ही ना थी
शेर लिखकर सुकून सा पाया |