अपना एहसास मर ना जाये कही
दर्द हद से गुज़र ना जाये कही
उन को देखे हुये हो गये सदियाँ
उन का चेहरा बिखर ना जाये कही
अब के आवाज़ दुँ तो आ जाना
दिल दिवाना सुधर ना जाये कही
उन का वादा तो है मगर दिल को
डर है के काफिर मुकर ना जाये कही
दर्द, जुगनू, हवा, गिल्ले शिकवे
ये मुकदर सवर ना जाये कही
मेरी दुनियाँ है दर्द की सुरत
गुल की सुरत निखर ना जाये कभी
खाक से अब तक तो आ पहुँचे
अब ये दरियाँ उधर ना जाये कही
ये मोहब्बत भी एक बला तेरी
हम को डर है वो डर ना जाये कही
इसलिये मुस्कुराये फिरता हुँ
उन की आंख भी ना भर जाये कही
दिल से गुज़रा तो है मगर
अपनी जान से गुज़र ना जाये कही |