डूबे डूबे दिल की जब, धडकन बढ जाती है
ऐसे मे फिर माँ की गोद, याद आती है
तमाम मुश्किलो से झूझ कर, जब लौटाते है हम
गुजारते वक़्त की आहट, हमारा मुँह चिडाती है
ऐसे मे फिर माँ की गोद, याद आती है
बाहो मे झुलती थी कभी, हमको हमारी माँ
झटके दे देकर हमको अब दुनियाँ - झुलाती है
ऐसे मे फिर माँ की गोद, याद आती है
किसी ने डांट क्या दिया, छुपा लेती माँ आँचल मे
ये दुनियाँ तो बात बात पर, दामन छुडाती है
ऐसे मे फिर माँ की गोद, याद आती है
अगर यूँ देखे तो, खुदगर्ज़ - कुछ कम नही हम भी
हमे भी तो, मुसीबत मे ही, माँ की याद आती है
डूबे डूबे दिल की जब, धडकन बढ जाती है
ऐसे मे फिर माँ की गोद, याद आती है |