आज किया फिर से ज़िक्र किसी ने तुम्हारा
हल्के-हल्के से फिर तुम याद आने लगी
मै फिर से पुरानि बातों के समुंद्र मे डूबने लगा
दिल मे एक बार फिर तुम उतरने लगी
पलकों के दरवाज़े को बंद किया मैने जब
और आंसू बन के तुम आंखो से बहने लगी
बेबसी इतनी के फिर से मेरे हाथ उठ गये
दुबारा खुदा से तुमको मांगने के लिये
ज़िक्र तुम्हारा सुनकर एक बार फिर से
मेरे जज़्बात तुम्हारी तमन्ना करने लगे
बना के तस्वीर तेरी मेरे ज़हन मे
मेरे टूटे अरमान रोने लगे
पा के तुम्हे ख्वाबो मे हम
जाग के फिर तुम्हे खोने लगे
वादा चाहता हूं तकदीर से ये
या तो तुझे मेरा बना दे या
मुझे तू फिर ना याद आये |