काश के दिल यू उदास ना होता
तुमसे मिल कर यादो मे गिरफ्तार ना होता
दिल मे इतना हमारे प्यार ना होता
तुम्हारे लिये मन बेकरार ना होता
तुम्हे जाने का कोई गम नही है
प्यार दिया तुमने जितना वो कम नही है
ना जाने आंखे क्यो नम है मेरी
रोकना चाहू भी खुद को रोक नही पाती
चेहरा तुम्हारा आंखो मे रहता है हर दम
नाम लबो पर और कहती है धडकन
तुम्हारा हमारा कैसा है बंधन
अजनबी हो तुम फिर क्यो लगते हो मेरे हमदम
ना मिल कर भी तुमसे मिल चुकी हूँ
ऐसा लगता है बरसो से तुम्हे जानती हूँ
साथ हो कर भी सबके मै तन्हा हूँ रहती
अपने मन की बात किसी से भी नही कहती
पढकर खत मेरा रूठ ना जाना
अगर थोडा सा भी प्यार हो तो लौट तुम आना |