दिल ही काफी है फकत हाल पे रोने के लिये
आंख को छोड दो नींद-भर सोने के लिये
तेरा साथ मुझे दे देता खुशियाँ ज़माने भर की
और तेरा जाना काफी है मुझे रुलाने के लिये
मै हंसती हूँ गम-ए दौर मे भी
दिल का दरियाँ है गम छुपाने के लिये
लौट गया दिल का मेरे सारा सुकून
खुश नही पास मेरे अब खोने के लिये
एक शाना ना मिला ढूंढे से
पल दो पल चैन से सोने के लिये
तीर सी बात आयी और गयी भी हो गयी
रहे गया दर्द पलकें भीगोने के लिये
दरो-दीवार ही फिर से साहारा देंगे
जब भी ख्वाहिश हुई रोने के लिये
हास-परिहास ताने-उल्हाने या दर्द ही
हम है हाज़िर तेरा समान धोने के लिये
जिसमे सिर्फ मै और मेरी तन्हाई हो
मुतेज़िर हूँ ऐसे किसी कोने के लिये |