कभी उसे भी मेरी याद सताती होगी
अपनी आंखो मे मेरे ख्वाब सजाती होगी
वो जो हर वक़्त ख्यालो मे बसी रहती है
कभी तो मेरी भी सोचो मे खो जाती होगी
वो जिसकी राह मे पलकें बिछी रहती है
कभी मुझे भी अपने पास बुलाती होगी
लबो पर रहती है वो हर पल हंसी बनकर
तसवर से मेरे, वो भी मुस्कुराती होगी
वो जो शामिल है मेरे गीत मेरे नगमो मे
कभी तन्हाई मे मुझको गुनगुनाती होगी
जिसके लिये मेरा दिल बेक़रार रहता है
मेरे लिये अपना चैन भी गवाती होगी
जिसे इज़्हार-ए-वफा हर पक करना चाहूँ
कभी इक़रार तो वो भी करना चाहती होगी
जिसके लिये मेरी हर रात है करवत करवट
कभी तो उसे भी नींद ना आती होगी
जिसकी उल्फत की शमा से है मेरा दिल रोशन
मेरी चाहत के वो भी दीप जलाती होगी
गमे-ए-फिराक़ मेरा ही मुक़द्दर है या फिर
मेरी जुदाई उसे भी युही रुलाती होगी |