एक लडकी थी जो चुप सी रहती थी
दर्द और गम वो सहती थी
किसी से कुछ ना कहती थी
उसने मन मे क्या है छुपाया
चाहती है क्या किसी को ना बताया
वो तन्हा सी रहती थी और खुद से कहती थी
एक लडकी थी जो चुप सी रहती थी
यू ही अनेखी क्यो नम हो जाती
मुस्कुराते मुस्कुराते खुद जाने कहाँ खो जाती
उदास चेहरो पर मुस्कुराहट लाया करती थी
एक लडकी थी जो चुप सी रहती थी
उसकी अदा की है क्या बात
हज़ारो मे भी लगती है वो सब मे खास
बातो मे उसके ऐसा जादू
जो मिले उससे तो हो जाये बेकाबू
इस मे नही उसकी कोई भी खता
दे सकता नही मै उसकी कोई भी मिसाल
एक लडकी थी तो चुप सी रहती थी
दर्द और गम वो सहती थी
किसी से कुछ ना कहती थी |