नाराज़ है तुझसे हम, ए ज़िन्दगी तू बेवफा है
सीख ले मौत से, वो जानती है क्या बेवफा है
ए मौत ! गले से लगा ले तू
ज़िन्दगी चलना सिखाती है, तो गिराती भी है तू ही
मौत को देख आती है, और साथ ले जाती है
सना-ए-वफा ए मौत! गले से लगा ले तू
तू खुशी देती है हंसना सिखाये उसे पहले रुला देती है
मौत को देख, आते ही सारे गम भुला देती है
ए मौत! गले से लगाले तू
हमदम बन साथ नचाती है तू तो कभी सालो नचाती है
मौत है मेहरबान, अपनी पनाहो मे ले जाती है
ए मौत! गले से लगा ले तू
जीवन भर बात सुनाती रहती तेरी, पर तुने उसकी एक ना सुनी
ए मौत! गले से लगा ले तू |